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Sunday, February 8, 2015

Mulayam ki boli

Mulayam-language-problem

Jab boli samaj na aye..

Toh mulayam singh karen koi upay..
नेताओं की बोली :

नेता बोलते हैं, तो बोलते ही हैं। जनता जो समझती है, समझती ही है। कुछ माननीय ऐसे होते हैं जो माइक की खराबी की वजह से बेहतर डिलिवर नहीं कर पाते। कुछ का एग्जीक्यूशन बहुत पेचीदा होता है। कई को सांप सूंघने की शिकायत होती है। अपना-अपना शौक है।

किसी ने बताया कि यह प्रूव हो चुका है कि खैनी-गुटखा जितनी राहत सुनाने वाले को पहुंचाता है, शायद सुनने वाला बाबलों की तरह झुंझला जाता है क्योंकि कुछ समझ ही नहीं आता।


Saturday, February 7, 2015